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पिता का अधूरा सपना बेटी ने किया पूरा, अदिति मिश्रा बनीं सब-इंस्पेक्टरआईटीआई बालाघाट में स्टेनो ट्रेड की टॉपर रहीं अदिति, दो साल शहडोल में गेस्ट फैकल्टी के रूप में दी सेवाएं

पिता का अधूरा सपना बेटी ने किया पूरा, अदिति मिश्रा बनीं सब-इंस्पेक्टरआईटीआई बालाघाट में स्टेनो ट्रेड की टॉपर रहीं अदिति, दो साल शहडोल में गेस्ट फैकल्टी के रूप में दी सेवाएंबालाघाट,29 सितंबर 2026। कुछ सफलताएं केवल एक व्यक्ति की नहीं होतीं। उनके पीछे परिवार के वर्षों के संघर्ष, त्याग, उम्मीद और लगातार प्रोत्साहन की कहानी छिपी होती है। ऐसी ही प्रेरणादायी कहानी है अदिति लालित्य मिश्रा की, जिन्होंने अपने परिश्रम और दृढ़ संकल्प के दम पर मध्यप्रदेश पुलिस विभाग में सब-इंस्पेक्टर (स्टेनो/बैक ऑफिस) पद पर चयन हासिल कर परिवार का मान बढ़ाया है। अदिति का चयन उनके लिए तो बड़ी उपलब्धि है ही, लेकिन उनके पिता लालित्य मिश्रा के लिए यह सफलता भावनाओं से जुड़ा एक खास पल है। बचपन से भारतीय सेना में जाकर देशसेवा करने का सपना देखने वाले लालित्य मिश्रा परिस्थितियों के चलते अपना यह सपना पूरा नहीं कर सके। वर्तमान में वे एमपीईबी, वारासिवनी में सेवाएं दे रहे हैं। अब बेटी का पुलिस सेवा में चयन उनके उस अधूरे सपने को एक नई अनुभूति दे रहा है।आईटीआई में टॉप से पुलिस सेवा तक का सफर अदिति ने आईटीआई बालाघाट से स्टेनो ट्रेड में टॉप किया। इसके बाद उन्होंने करीब दो वर्षों तक आईटीआई शहडोल में गेस्ट फैकल्टी के रूप में सेवाएं दीं। नौकरी के साथ-साथ उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखी। इस सफर में सफलता हमेशा उनके साथ नहीं रही। उन्होंने कई प्रतियोगी परीक्षाओं में हिस्सा लिया, लेकिन कुछ परीक्षाओं में वे महज एक-दो अंकों के अंतर से चयन से चूक गईं। ऐसी परिस्थितियां किसी भी अभ्यर्थी के हौसले को कमजोर कर सकती हैं, लेकिन अदिति ने असफलताओं को रुकावट नहीं बनने दिया। उन्होंने अपनी कमियों से सीखते हुए तैयारी जारी रखी और आखिरकार वह मुकाम हासिल किया, जिसका सपना उन्होंने देखा था।मां ने हर कदम पर दिया साथ अदिति की सफलता के पीछे उनके माता-पिता के सहयोग की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनकी मां श्रीमती आरती मिश्रा ने बेटी की तैयारी के दौरान हर कदम पर उसका साथ दिया। परीक्षा और अन्य जरूरी कार्यों के लिए बेटी के साथ सैकड़ों किलोमीटर की यात्राएं करने से लेकर शहडोल में उसके साथ रहकर उसकी तैयारी में सहयोग करने तक, मां ने बेटी का हौसला बनाए रखा। परिवार का यह सहयोग अदिति के लिए उस समय और महत्वपूर्ण रहा, जब उन्हें लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रयास करने के बावजूद अपेक्षित सफलता नहीं मिल रही थी।असफलताओं से सीखकर हासिल की सफलता अदिति की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान असफलताओं का सामना कर रहे हैं। एक-दो अंकों से चयन से चूकने के बाद भी उन्होंने प्रयास नहीं छोड़ा। लगातार मेहनत, धैर्य और अपने लक्ष्य पर विश्वास बनाए रखा और अंततः मध्यप्रदेश पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के पद तक पहुंचने में सफल रहीं। आगामी दिनों में अदिति भोपाल पहुंचकर अपनी नई जिम्मेदारी संभालेंगी। उनकी इस उपलब्धि से परिवार, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों में खुशी का माहौल है।बेटी की सफलता बनी पूरे परिवार का गौरव अदिति की सफलता ने यह साबित किया है कि लक्ष्य बड़ा हो तो रास्ते में आने वाली असफलताएं मंजिल को रोक नहीं सकतीं। पिता का अधूरा सपना बेटी ने अपने परिश्रम से पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। यह उपलब्धि अदिति के साथ-साथ उनके माता-पिता के त्याग, विश्वास और वर्षों की मेहनत की भी जीत है। अदिति की सफलता पर परिजनों एवं शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं।

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