Chhattisgarh

नन्हे कदमों की पहली पाठशाला में गूंजा शिक्षक सम्मान का भावआंगनबाड़ी केंद्र लोहरसी में बच्चों के बीच मनाया गया शिक्षक दिवस, मालती साहू का किया सम्मान,

देव प्रसाद बघेल: शिक्षा केवल अक्षरों और पुस्तकों का ज्ञान नहीं, बल्कि संस्कार, अनुशासन और जीवन को सही दिशा देने वाली वह ज्योति है, जिसकी पहली किरण बालमन पर परिवार और आंगनबाड़ी की चौखट से पड़ती है। इसी भाव को आत्मसात करते हुए शिक्षक दिवस के अवसर पर ग्राम लोहरसी के आंगनबाड़ी केंद्र में भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष दीपक साहू ने अपने पुत्र आदित्य साहू के साथ पहुंचकर नन्हे-मुन्ने बच्चों के बीच शिक्षक दिवस मनाया। इस अवसर पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मालती साहू का शाल, श्रीफल एवं पेन भेंटकर सम्मान किया गया तथा मिठाई खिलाकर शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं दी गईं।इस अवसर पर दीपक साहू ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र नन्हे बच्चों के लिए शिक्षा के विशाल संसार में प्रवेश करने की प्रथम पाठशाला है। यहां खेल, गीत, कहानी और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों के भीतर सीखने की जिज्ञासा को जागृत किया जाता है। बाल्यावस्था में मिले संस्कार और ज्ञान जीवन की मजबूत आधारशिला बनते हैं, इसलिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का दायित्व अत्यंत महत्वपूर्ण है।उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र केवल बच्चों के बैठने और पढ़ने का स्थान नहीं, बल्कि बाल विकास, पोषण, स्वास्थ्य, स्वच्छता और संस्कारों का संगम है। यहां बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास के साथ उनकी सामाजिक समझ, व्यवहार कुशलता और अभिव्यक्ति की क्षमता को भी निखारने का प्रयास किया जाता है। खेल-खेल में शिक्षा देकर बच्चों के मन में सीखने की ऐसी लौ प्रज्वलित की जाती है, जो आगे चलकर उनके उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त करती है।दीपक साहू ने कहा कि शिक्षक का सम्मान वास्तव में उस ज्ञान परंपरा का सम्मान है, जो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक संस्कार और विवेक का प्रकाश पहुंचाती है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी बालमन के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। नन्हे बच्चों की मासूम मुस्कान में भविष्य के भारत की तस्वीर दिखाई देती है और उस तस्वीर को आकार देने में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है।उन्होंने अभिभावकों से भी आग्रह किया कि वे बच्चों को नियमित रूप से आंगनबाड़ी केंद्र भेजें तथा उनके पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा के प्रति सजग रहें। उन्होंने कहा कि बच्चे राष्ट्र की अमूल्य धरोहर हैं और उनके बचपन को स्वस्थ, संस्कारित एवं शिक्षित बनाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।शिक्षक दिवस के इस आत्मीय आयोजन में बच्चों के बीच खुशियों और अपनत्व का वातावरण रहा। सम्मान प्राप्त करने पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मालती साहू ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बच्चों के बीच शिक्षक दिवस मनाना और उनके कार्य का सम्मान किया जाना निश्चित रूप से उन्हें और अधिक उत्साह एवं समर्पण के साथ कार्य करने की प्रेरणा देता है।इस

दौरान बच्चों के चेहरे पर उल्लास और उत्साह देखते ही बन रहा था। छोटे-छोटे हाथों में कलम और आंखों में भविष्य के सपनों के बीच मनाया गया यह शिक्षक दिवस ज्ञान, संस्कार और सम्मान की सुंदर त्रिवेणी बनकर यादगार रहा।

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