छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस पर लिकेश महंत ने समस्त प्रदेशवासियों को दी हार्दिक बधाई एवं मंगलमय शुभकामनाएँ, देखिए खास खबर…….

छत्तीसगढ़ की गौरवशाली संस्कृति, ऐतिहासिक विरासत, लोककला, प्राकृतिक सौंदर्य और सामाजिक एकता की सराहना की; कहा—हमर छत्तीसगढ़, हमर अभिमान, इसकी पहचान और सम्मान को विश्व पटल पर और ऊँचाइयों तक पहुँचाना हम सभी की जिम्मेदारी।

संवाद समृद्धि पथ छत्तीसगढ़ बेमेतरा बेमेतरा :- छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के पावन एवं गौरवशाली अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता एवं भीम रेजिमेंट छत्तीसगढ़ के प्रदेश मीडिया प्रभारी युवा लिकेश महंत ने छत्तीसगढ़ के समस्त प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं अनंत मंगलमय शुभकामनाएँ प्रेषित की हैं। इस अवसर पर उन्होंने छत्तीसगढ़ की गौरवशाली संस्कृति, समृद्ध परंपरा, ऐतिहासिक विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य, लोककला, सामाजिक एकता और प्रदेश की विशिष्ट पहचान का उल्लेख करते हुए छत्तीसगढ़ महतारी की पावन धरती को नमन किया।
लिकेश महंत ने अपने शुभकामना संदेश में कहा कि छत्तीसगढ़ केवल भारत के मानचित्र पर स्थित एक राज्य नहीं, बल्कि अपनी हजारों वर्षों की सांस्कृतिक विरासत, गौरवशाली इतिहास, अनूठी परंपराओं, सरल स्वभाव, मेहनतकश लोगों और आपसी प्रेम एवं भाईचारे के लिए विशेष पहचान रखने वाली पावन धरती है। छत्तीसगढ़ की मिट्टी में अपनापन है, यहाँ की भाषा में मिठास है, यहाँ के लोगों के व्यवहार में सरलता है और यहाँ की संस्कृति में समरसता एवं मानवता की सुंदर झलक देखने को मिलती है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान यहाँ के पारंपरिक लोकगीतों, लोकनृत्यों, तीज-त्योहारों, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक आयोजनों से होती है। पंथी नृत्य, राउत नाचा, सुआ नृत्य, करमा नृत्य, गेड़ी नृत्य और लोकनाट्य की समृद्ध परंपरा हमारी सांस्कृतिक धरोहर हैं। यहाँ के कलाकार अपनी कला और प्रतिभा के माध्यम से छत्तीसगढ़ की पहचान को देशभर में पहुँचाने का कार्य कर रहे हैं। विशेष रूप से पंथी नृत्य, जो संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी के संदेशों और विचारों से जुड़ी सांस्कृतिक अभिव्यक्ति है, छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान को एक विशेष गौरव प्रदान करता है।
उन्होंने छत्तीसगढ़ी भाषा की प्रशंसा करते हुए कहा कि हमर छत्तीसगढ़ी भाखा हमर पहिचान आय। छत्तीसगढ़ी भाषा की मिठास, लोकगीतों की मधुरता और यहाँ के लोगों की सहज अभिव्यक्ति प्रदेश की संस्कृति को और भी सुंदर बनाती है। हरेली, तीजा, पोला, छेरछेरा, छठ पर्व, दीपावली, होली और अनेक पारंपरिक उत्सव यहाँ के जनजीवन में खुशियों, परंपराओं और आपसी मेलजोल का संदेश देते हैं। यहाँ के पारंपरिक व्यंजन जैसे ठेठरी, खुरमी, चीला, फरा, अंगाकर रोटी और बोरे-बासी भी छत्तीसगढ़ की खानपान संस्कृति की अपनी अलग पहचान रखते हैं।
लिकेश महंत ने कहा कि प्राकृतिक सौंदर्य की दृष्टि से भी छत्तीसगढ़ अत्यंत समृद्ध प्रदेश है। यहाँ के घने वन, पर्वत, नदियाँ, झरने, जलप्रपात और प्राकृतिक संपदा इस धरती की सुंदरता को चार चाँद लगाते हैं। बस्तर का विश्वप्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात, तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, सिरपुर की ऐतिहासिक विरासत, भोरमदेव मंदिर, राजिम का त्रिवेणी संगम, गिरौदपुरी धाम, डोंगरगढ़ का माँ बम्लेश्वरी मंदिर, दंतेश्वरी मंदिर और बारनवापारा अभयारण्य जैसे धार्मिक, ऐतिहासिक एवं पर्यटन स्थल छत्तीसगढ़ की पहचान को देश-दुनिया तक पहुँचाते हैं। इन स्थलों में हमारी आस्था, इतिहास, प्रकृति और सभ्यता की सुंदर झलक दिखाई देती है।
उन्होंने प्रदेश के आदिवासी समाज की गौरवशाली संस्कृति एवं परंपराओं का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान यहाँ के आदिवासी समाज की अनूठी जीवनशैली, पारंपरिक वेशभूषा, लोककला, प्रकृति के प्रति सम्मान और सामुदायिक एकता से भी है। बस्तर दशहरा जैसी विशिष्ट सांस्कृतिक परंपराएँ छत्तीसगढ़ की समृद्ध विरासत को दर्शाती हैं। आदिवासी समाज की कला, संस्कृति, परंपरा और प्रकृति के साथ उनका जुड़ाव हमारी सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न हिस्सा है, जिसे संरक्षित करना हम सभी का दायित्व है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की वास्तविक ताकत यहाँ के मेहनतकश किसान, मजदूर, युवा, मातृशक्ति, आदिवासी समाज, कलाकार, व्यापारी, कर्मचारी और प्रत्येक नागरिक हैं। धान का कटोरा कहलाने वाला हमारा छत्तीसगढ़ कृषि और किसानों की मेहनत के लिए विशेष पहचान रखता है। खेतों में मेहनत करने वाले किसान प्रदेश की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण जीवन की मजबूत नींव हैं। वहीं युवा अपनी प्रतिभा, शिक्षा, खेल, कला, तकनीक और सामाजिक कार्यों के माध्यम से प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं। हमें प्रत्येक वर्ग के सम्मान, अधिकार, शिक्षा, रोजगार और विकास के लिए सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
लिकेश महंत ने छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक एवं सामाजिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह वही पावन धरती है, जहाँ संत शिरोमणि परम पूज्य बाबा गुरु घासीदास जी ने जन्म लेकर संपूर्ण मानव समाज को सत्य, अहिंसा, समानता और मानवता का महान संदेश दिया। बाबा गुरु घासीदास जी का अमर संदेश ‘मनखे-मनखे एक समान’ केवल एक विचार नहीं, बल्कि मानव समाज को जोड़ने वाला जीवन दर्शन है। उनका संदेश आज भी समाज में प्रेम, भाईचारे, समानता और सामाजिक सद्भाव स्थापित करने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने परम पूज्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी के विचारों को याद करते हुए कहा कि शिक्षा, समानता, न्याय, स्वतंत्रता और बंधुत्व किसी भी सभ्य समाज की मजबूत नींव हैं। बाबा साहेब ने संविधान के माध्यम से प्रत्येक नागरिक को अधिकारों और सम्मान के साथ जीवन जीने का मार्ग प्रदान किया। हमें बाबा गुरु घासीदास जी के मानवतावादी विचारों और बाबा साहेब के संवैधानिक आदर्शों को अपने जीवन में अपनाकर एक शिक्षित, जागरूक, समतामूलक और विकसित समाज के निर्माण में योगदान देना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान किसी एक जाति, समाज, भाषा या वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि यहाँ निवास करने वाले सभी समुदायों, धर्मों, जातियों और वर्गों की साझी संस्कृति एवं एकता से बनती है। हमारी विविधता ही हमारी सुंदरता है। आपसी सम्मान, प्रेम, सहयोग और भाईचारे की भावना को मजबूत बनाकर ही हम एक खुशहाल एवं समृद्ध छत्तीसगढ़ का निर्माण कर सकते हैं।
लिकेश महंत ने कहा कि राज्य स्थापना दिवस केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि अपने प्रदेश के गौरवशाली इतिहास को याद करने, अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और भविष्य के विकास के लिए नए संकल्प लेने का भी महत्वपूर्ण अवसर है। हमें अपनी आने वाली पीढ़ियों को छत्तीसगढ़ के इतिहास, महापुरुषों के विचारों, लोककला, लोकसंस्कृति, पारंपरिक त्योहारों और मातृभाषा के महत्व से परिचित कराना चाहिए, ताकि हमारी सांस्कृतिक पहचान आने वाले समय में भी सुरक्षित एवं जीवंत बनी रहे।
उन्होंने प्रदेश के युवाओं से विशेष अपील करते हुए कहा कि युवा शक्ति किसी भी प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य की सबसे बड़ी ताकत होती है। युवाओं को शिक्षा, सामाजिक जागरूकता, खेल, कला, साहित्य, रोजगार और जनसेवा के क्षेत्र में आगे बढ़कर अपनी प्रतिभा का परिचय देना चाहिए। साथ ही नशामुक्ति, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक सद्भाव, महिला सम्मान, शिक्षा और जरूरतमंद लोगों की सहायता जैसे कार्यों में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि हमारा सपना ऐसा छत्तीसगढ़ होना चाहिए, जहाँ प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर मिलें, किसानों को उनकी मेहनत का सम्मान मिले, महिलाओं को समान अधिकार एवं सुरक्षा मिले, जरूरतमंदों को न्याय मिले और प्रत्येक नागरिक को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर प्राप्त हो। विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे, यही सच्चे अर्थों में विकसित और खुशहाल छत्तीसगढ़ की पहचान होगी।
अंत में लिकेश महंत ने छत्तीसगढ़ के समस्त प्रदेशवासियों के सुख, शांति, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना करते हुए कहा कि हमारा प्यारा छत्तीसगढ़ निरंतर विकास की नई ऊँचाइयों को छुए। यहाँ की संस्कृति, सभ्यता, लोककला, परंपरा और भाईचारे की पहचान देश ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में गौरव के साथ स्थापित हो। हम सभी मिलकर अपने प्रदेश की आन-बान-शान को बनाए रखें और छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करने में अपना योगदान दें।
हमर छत्तीसगढ़, हमर अभिमान!
छत्तीसगढ़ महतारी के जयगान से गूंजे पूरा हिंदुस्तान
