पेंड्रावन महाविद्यालय में दीपोत्सव एवं सुवा नृत्य का भव्य आयोजन, छत्तीसगढ़ी संस्कृति की दिखी मनमोहक झलक, देखिए खास खबर…..


संवाद समृद्धि पथ छत्तीसगढ़ दुर्ग पेंड्रावन :- शासकीय नवीन महाविद्यालय, पेंड्रावन में दिनांक 06 नवंबर 2026 को धनतेरस के पावन अवसर पर दीपोत्सव एवं सुवा नृत्य का भव्य एवं उत्साहपूर्ण आयोजन किया गया। प्रभारी प्राचार्य सुश्री दामिनी कावड़े के सकारात्मक एवं ऊर्जावान नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपरा एवं लोककलाओं का शानदार प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से श्री बहल पटेल (सांसद प्रतिनिधि), श्री डिसन सिन्हा (विधायक प्रतिनिधि), श्री दशरथ सिन्हा (जनभागीदारी समिति अध्यक्ष) एवं श्री शशिकांत सिन्हा (सरपंच प्रतिनिधि) की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों एवं प्रभारी प्राचार्य द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।
इसके पश्चात विद्यार्थियों द्वारा पारंपरिक गोल घेरे में सुवा नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी गई। विद्यार्थियों ने पारंपरिक लोकगीतों की मधुर धुन पर थिरकते हुए छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की जीवंत छवि प्रस्तुत की। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ी पारंपरिक वेशभूषा प्रतियोगिता, सुवा सजावट प्रतियोगिता एवं सुवा नृत्य प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया। सभी प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपनी प्रतिभा एवं रचनात्मकता का परिचय दिया। विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं एवं प्रतिभागियों को उपस्थित जनप्रतिनिधियों द्वारा प्रोत्साहन स्वरूप नकद पुरस्कार प्रदान किए गए।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में श्री बहल पटेल (सांसद प्रतिनिधि) सहित अन्य अतिथियों ने विद्यार्थियों को आशीर्वचन प्रदान करते हुए उनके प्रयासों की सराहना की तथा भारतीय एवं छत्तीसगढ़ी संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन में युवाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

इस अवसर पर प्रभारी प्राचार्य सुश्री दामिनी कावड़े ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि सुवा नृत्य छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकपरंपरा, सांस्कृतिक पहचान एवं सामूहिक एकता का प्रतीक है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के साथ-साथ उनकी प्रतिभा, रचनात्मकता एवं आत्मविश्वास को भी विकसित करते हैं। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम की सफल समन्वयक श्रीमती संध्या ध्रुवे (सहायक प्राध्यापक, प्राणीशास्त्र) रहीं। आयोजन में महाविद्यालय के प्राध्यापकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों का सराहनीय योगदान रहा।
इस प्रकार दीपों की रोशनी, पारंपरिक वेशभूषा और सुवा नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियों के बीच यह आयोजन छत्तीसगढ़ी लोकसंस्कृति एवं परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन का यादगार उत्सव बन गया।




