गांव की सड़क और स्ट्रीट लाइट की समस्या उठाना पड़ा भारी, युवक ने सरपंच पति पर लगाए धमकी देने के आरोपसोशल मीडिया ग्रुप में वीडियो डालने के बाद फोन पर धमकाने का आरोप; दीपेश बिसेन ने मीडिया को बताई आपबीती, पंचायत में महिलाओं के प्रतिनिधित्व पर भी उठे सवाल


गांव की सड़क और स्ट्रीट लाइट की समस्या उठाना पड़ा भारी, युवक ने सरपंच पति पर लगाए धमकी देने के आरोपसोशल मीडिया ग्रुप में वीडियो डालने के बाद फोन पर धमकाने का आरोप; दीपेश बिसेन ने मीडिया को बताई आपबीती, पंचायत में महिलाओं के प्रतिनिधित्व पर भी उठे सवाल
संवाद समृद्धि पथ पवन कश्यप बालाघाट जिला ब्यूरो चीफ

किरनापुर। जनपद पंचायत किरनापुर अंतर्गत ग्राम पंचायत कान्द्री खुर्द के ग्राम माधोटोला में सड़क और स्ट्रीट लाइट की समस्या को लेकर एक युवक द्वारा सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करने के बाद विवाद सामने आया है। ग्राम निवासी दीपेश बिसेन ने ग्राम पंचायत के सरपंच पति लोकेश मडामें पर फोन कर धमकी देने के आरोप लगाए हैं। युवक का कहना है कि उसने गांव के विकास और अपने वार्ड में स्ट्रीट लाइट की कमी का मुद्दा उठाया था, लेकिन समस्या का समाधान करने के बजाय उसे धमकियों का सामना करना पड़ा।गांव की समस्या को लेकर सोशल मीडिया पर डाला था वीडियोदीपेश बिसेन के अनुसार, 11 अक्टूबर को उन्होंने अपने गांव की सड़क और स्ट्रीट लाइट की समस्या को लेकर सोशल मीडिया ग्रुप में एक वीडियो साझा किया था। उनका कहना है कि गांव के अन्य हिस्सों में स्ट्रीट लाइट लगी हुई हैं, लेकिन उनके वार्ड में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था नहीं है। रात के समय अंधेरा रहने के कारण ग्रामीणों को परेशानी होती है। दीपेश का दावा है कि इस समस्या को लेकर उन्होंने पहले भी पंचायत में आवेदन दिया था, लेकिन अब तक स्ट्रीट लाइट लगाने की मांग पूरी नहीं हुई।वीडियो वायरल होने के बाद फोन पर धमकाने का आरोपदीपेश बिसेन का आरोप है कि सोशल मीडिया ग्रुप में वीडियो डालने के बाद सरपंच पति लोकेश मडामें ने उन्हें फोन किया और वीडियो साझा करने को लेकर सवाल किए। दीपेश के मुताबिक, उन्होंने फोन पर स्पष्ट किया कि वीडियो डालने का उद्देश्य किसी का विरोध करना नहीं, बल्कि गांव के विकास से जुड़ी समस्या को सामने लाना था।दीपेश ने आरोप लगाया कि इस बातचीत के दौरान सरपंच पति ने उनके साथ कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और घर में घुसकर जान से मारने की धमकी दी। युवक का यह भी आरोप है कि उन्हें उनकी जिंदगी बर्बाद करने जैसी बातें कही गईं। इन कथित धमकियों से भयभीत दीपेश ने अपनी आपबीती मीडिया के सामने रखी है।क्या गांव के विकास की बात उठाना गलत है?इस मामले ने ग्रामीण क्षेत्रों में जनसमस्याओं को उठाने और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े किए हैं। यदि किसी वार्ड में सड़क, स्ट्रीट लाइट, पेयजल या अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी है, तो ग्रामीणों को संबंधित पंचायत के समक्ष अपनी बात रखने और समस्या के समाधान की मांग करने का अधिकार है। किसी शिकायत या आलोचना पर विवाद के बजाय संवाद और नियमानुसार कार्रवाई की अपेक्षा की जाती है।दीपेश बिसेन का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल अपने गांव का विकास कराना और वार्ड की समस्या का समाधान करवाना है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब कोई ग्रामीण अपनी बुनियादी समस्या को सार्वजनिक रूप से सामने रखता है, तो उसकी शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाय विवाद की स्थिति क्यों बनती है?महिला सरपंचों के अधिकार और सरपंच पति की भूमिका पर भी सवालइस घटना के संदर्भ में पंचायतों में महिला जनप्रतिनिधियों की वास्तविक भूमिका को लेकर भी चर्चा जरूरी है। मध्य प्रदेश में महिलाओं को पंचायतों में आरक्षण के माध्यम से प्रतिनिधित्व के अवसर दिए गए हैं, ताकि वे स्थानीय शासन और विकास कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभा सकें। लेकिन कई स्थानों पर निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों के स्थान पर उनके पति के कार्यों में हस्तक्षेप या प्रतिनिधित्व करने की शिकायतें सामने आती रहती हैं।हालांकि, माधोटोला के इस मामले में महिला सरपंच की भूमिका और उनकी जानकारी के संबंध में स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में बिना तथ्यों की पुष्टि किए किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। फिर भी यह सवाल महत्वपूर्ण है कि पंचायत का निर्वाचित प्रतिनिधि ही अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों के अनुसार कार्य करे तथा पंचायत से जुड़े निर्णय पारदर्शी तरीके से लिए जाएं।प्रशासन से निष्पक्ष जांच और समस्या के समाधान की अपेक्षामाधोटोला की स्ट्रीट लाइट और सड़क संबंधी समस्याओं का निराकरण करना पंचायत की प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए। साथ ही, दीपेश बिसेन द्वारा लगाए गए धमकी के आरोपों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।ग्रामीणों को उम्मीद है कि संबंधित पंचायत और प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए वार्ड में रोशनी की व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे, ताकि लोगों को अंधेरे की समस्या से राहत मिल सके। गांव के विकास से जुड़े सवालों का समाधान विवाद या दबाव से नहीं, बल्कि जवाबदेही, संवाद और नियमानुसार कार्रवाई से होना चाहिए।


