वन्यजीव संरक्षण सप्ताह में वन्य अपराधों की रोकथाम पर प्रशिक्षणलांजी में वन अमले एवं RRT सदस्यों को अपराध स्थल प्रबंधन, साक्ष्य संकलन और न्यायालयीन प्रक्रिया की दी गई व्यवहारिक जानकारी

वन्यजीव संरक्षण सप्ताह में वन्य अपराधों की रोकथाम पर प्रशिक्षण
लांजी में वन अमले एवं RRT सदस्यों को अपराध स्थल प्रबंधन, साक्ष्य संकलन और न्यायालयीन प्रक्रिया की दी गई व्यवहारिक जानकारी

लांजी, 4 अक्टूबर 2026। वन्यजीव संरक्षण सप्ताह (1 अक्टूबर से 7 अक्टूबर) के अवसर पर वन्य प्राणी संरक्षण एवं प्रबंधन योजना अंतर्गत वन विभाग द्वारा नीलामी कक्ष, लांजी में विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य वन्यजीव अपराधों की रोकथाम, अपराधों की प्रभावी विवेचना, साक्ष्यों के वैज्ञानिक संकलन तथा न्यायालयीन कार्रवाई की प्रक्रिया को लेकर वन अमले को व्यावहारिक रूप से दक्ष बनाना रहा।प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन मुख्य वन संरक्षक, वनवृत्त बालाघाट श्री गौरव चौधरी, भा.व.से. के मार्गदर्शन एवं वन मंडलाधिकारी, दक्षिण सामान्य वन मंडल बालाघाट श्री नित्यानंदम एल., भा.व.से. के निर्देशन में तथा उपवनमंडलाधिकारी, लांजी सामान्य श्री अरविंद केन, स.व.सं. के मार्गदर्शन में किया गया।
वन्यजीव अपराधों की रोकथाम पर मिला व्यावहारिक प्रशिक्षण

कार्यशाला के दौरान वन्यजीव अपराधों से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षणार्थियों को वन्यजीव अपराधों के प्रकार, अपराध करने के विभिन्न तरीकों तथा ऐसे मामलों में विभागीय स्तर पर की जाने वाली आवश्यक कार्रवाई के संबंध में जानकारी दी गई।प्रशिक्षण में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की प्रमुख धाराओं एवं प्रासंगिक कानूनी प्रावधानों को समझाया गया। इसके साथ ही वन्यजीव अपराध घटित होने की स्थिति में निर्धारित SOP के अनुसार कार्रवाई, अपराध स्थल से साक्ष्यों का संकलन एवं संरक्षण, साक्ष्यों के दस्तावेजीकरण तथा अपराध की विवेचना के दौरान आवश्यक अभिलेख तैयार करने की प्रक्रिया पर भी विस्तार से जानकारी दी गई।प्रशिक्षणार्थियों को न्यायालयीन कार्यवाही से संबंधित आवश्यक प्रक्रियाओं एवं सावधानियों के बारे में भी बताया गया, ताकि वन्यजीव अपराध से जुड़े प्रकरणों में कानूनी कार्रवाई प्रभावी एवं साक्ष्य आधारित तरीके से की जा सके।
क्राइम सीन रीक्रिएशन से समझाई वैज्ञानिक जांच

कार्यशाला की खास बात यह रही कि प्रशिक्षण के दौरान क्राइम सीन रीक्रिएशन के माध्यम से अपराध स्थल के वैज्ञानिक परीक्षण एवं साक्ष्य संकलन की प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इससे वन अमले को मौके पर उपलब्ध साक्ष्यों की पहचान, उनके संरक्षण और प्रकरण की विवेचना में उनके उपयोग की प्रक्रिया को बेहतर तरीके से समझने का अवसर मिला।कार्यशाला में प्रशिक्षक के रूप में श्री नितिन देसाई, डायरेक्टर, Central India Wildlife Protection Society of India (WPSI) ने वन्यजीव अपराधों की पहचान, अपराध स्थल प्रबंधन, साक्ष्य संकलन, अपराध विवेचना तथा न्यायालयीन कार्यवाही से जुड़े महत्वपूर्ण एवं व्यवहारिक पहलुओं की जानकारी प्रदान की।
तीन वन परिक्षेत्रों के अमले और RRT सदस्यों की सहभागिता
प्रशिक्षण कार्यशाला में पूर्व लांजी, पश्चिम लांजी एवं किरनापुर वन परिक्षेत्र के वन अमले तथा RRT सदस्यों ने सक्रिय रूप से सहभागिता की। प्रशिक्षण के माध्यम से वन्यजीव अपराधों से निपटने के लिए मौके पर त्वरित कार्रवाई, साक्ष्य सुरक्षित रखने और कानूनी प्रावधानों के प्रभावी उपयोग पर विशेष जोर दिया गया।प्रशिक्षण के उपरांत सभी प्रशिक्षणार्थियों को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम की लघु हैंडबुक भी प्रदान की गई। इसका उद्देश्य वन्यजीव अपराधों से संबंधित प्रकरणों में अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अधिनियम के प्रावधानों तथा निर्धारित प्रक्रियाओं का मौके पर प्रभावी ढंग से उपयोग करने में सहायता प्रदान करना है।
स्कूलों में भी पहुंचा वन्यजीव संरक्षण का संदेश
वन्यजीव संरक्षण सप्ताह के अंतर्गत विभाग द्वारा केवल वन अमले तक ही गतिविधियों को सीमित नहीं रखा गया, बल्कि आम नागरिकों एवं विद्यार्थियों को भी वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है।इसी क्रम में सांदीपनि विद्यालय, बोलेगांव में वन विभाग द्वारा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर स्कूली बच्चों को वन्यजीवों के संरक्षण के लिए प्रेरित किया गया। वन परिक्षेत्र अधिकारी सपन ताम्रकार द्वारा विद्यार्थियों को वन, वन्यप्राणियों एवं पर्यावरण के महत्व की जानकारी देते हुए वन्यजीवों की सुरक्षा में समाज एवं युवा पीढ़ी की भूमिका के बारे में बताया गया।
ग्रामीण समितियों के माध्यम से भी जागरूकता
वन विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में भी समितियों के माध्यम से लोगों को वन एवं वन्यप्राणी संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है। ग्रामीणों को वन्यजीवों की सुरक्षा, जंगलों की रक्षा तथा वन्यजीवों से संबंधित किसी भी अवैध गतिविधि की जानकारी तत्काल वन विभाग तक पहुंचाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।वन्यजीव संरक्षण सप्ताह के दौरान आयोजित इन गतिविधियों का उद्देश्य वन्यजीवों के संरक्षण को केवल विभागीय जिम्मेदारी तक सीमित न रखते हुए वन विभाग, ग्रामीण समुदाय, विद्यार्थी एवं आम नागरिकों की सामूहिक भागीदारी सुनिश्चित करना है।वन विभाग का संदेश है कि वन और वन्यजीव प्राकृतिक संपदा के महत्वपूर्ण अंग हैं। इनके संरक्षण के लिए कानून का पालन करने के साथ-साथ समाज में जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना आवश्यक है। प्रशिक्षण कार्यशाला एवं जनजागरूकता कार्यक्रम इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखे जा रहे हैं।



