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सरगुजा संभाग वीरेन्द्र तिवारीघायल पशुओं की सेवा में जुटी बबली, अब गौशाला के लिए मुख्यमंत्री से लगाई गुहार बालाझार की युवती

सरगुजा संभाग वीरेन्द्र तिवारीघायल पशुओं की सेवा में जुटी बबली, अब गौशाला के लिए मुख्यमंत्री से लगाई गुहार बालाझार की युवती ने बनाया घर को ही पशु सेवा केंद्र, दुर्घटनाग्रस्त गाय-नंदी से लेकर कुत्ते, बिल्ली और बंदरों का करती हैं निःशुल्क उपचारपत्थलगांव/जशपुर, 5 मई 2026।पत्थलगांव विकासखंड के ग्राम बालाझार की रहने वाली लूमडीनी पोर्ते उर्फ बबली पोर्ते इन दिनों घायल और बीमार पशुओं की सेवा के लिए क्षेत्र में मिसाल बनी हुई हैं। जहां सड़क हादसों या अन्य कारणों से घायल पशुओं को अक्सर मदद का इंतजार रहता है, वहीं बबली सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचकर उनका रेस्क्यू करती हैं और अपने स्तर पर उपचार एवं देखभाल में जुट जाती हैं।बबली आसपास के गांवों में दुर्घटनावश घायल होने वाले गाय, नंदी, कुत्ते, बिल्ली और बंदरों समेत अन्य पशुओं की निःशुल्क सेवा करती हैं। घायल पशु के बारे में जानकारी मिलने पर वह स्वयं मौके तक पहुंचती हैं। जरूरत पड़ने पर पशु को सुरक्षित तरीके से अपने घर लाकर उसकी देखभाल करती हैं और उपचार उपलब्ध कराने का प्रयास करती हैं।घर बना घायल पशुओं का सहारासीमित संसाधनों के बावजूद बबली लंबे समय से पशुओं की सेवा में जुटी हैं। उनके घर पर कई बार ऐसे पशु पहुंचते हैं, जिन्हें सड़क दुर्घटना, बीमारी या अन्य कारणों से तत्काल देखभाल की आवश्यकता होती है। वह अपनी क्षमता के अनुसार उनके लिए भोजन, दवा और आवश्यक देखभाल की व्यवस्था करती हैं।उनका कहना है कि घायल पशु अपनी तकलीफ खुद नहीं बता सकते। ऐसे में उनकी मदद करना इंसानियत का दायित्व है। इसी सोच के साथ वह बिना किसी शुल्क के पशुओं की सेवा कर रही हैं।संसाधनों की कमी बनी बड़ी चुनौतीपशुओं की संख्या बढ़ने के साथ बबली के सामने सबसे बड़ी समस्या उचित स्थान और संसाधनों की कमी की है। घर पर घायल और बीमार पशुओं को रखने के कारण जगह की समस्या भी सामने आती है। कई मामलों में पशुओं को बेहतर उपचार और लंबे समय तक देखभाल की आवश्यकता होती है, जिसके लिए पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध नहीं हो पाती।इसी समस्या को देखते हुए बबली ने मुख्यमंत्री से गौशाला की मांग की है। उनका कहना है कि यदि क्षेत्र में एक व्यवस्थित गौशाला या पशु सेवा केंद्र उपलब्ध हो जाए तो घायल, बीमार और बेसहारा पशुओं को सुरक्षित स्थान मिल सकेगा और उनकी बेहतर तरीके से देखभाल की जा सकेगी।सेवा को व्यवस्थित केंद्र का इंतजारबबली की पहल केवल गायों तक सीमित नहीं है। वह अलग-अलग प्रजातियों के घायल पशुओं को बचाने और उनकी देखभाल करने का प्रयास कर रही हैं। हालांकि, व्यक्तिगत स्तर पर यह काम करने में उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।यदि प्रशासन और समाज की ओर से उन्हें आवश्यक सहयोग, स्थान, चिकित्सा सुविधाएं और संसाधन उपलब्ध हों, तो पशु सेवा के इस कार्य को और व्यापक रूप दिया जा सकता है। बालाझार की बबली की मांग अब इसी दिशा में है कि क्षेत्र में ऐसा केंद्र स्थापित हो, जहां दुर्घटनाग्रस्त और बेसहारा पशुओं को समय पर उपचार और सुरक्षित आश्रय मिल सके।बालाझार की यह युवती अपने प्रयासों से यह संदेश दे रही है कि संवेदना और सेवा की शुरुआत बड़े संसाधनों से नहीं, बल्कि छोटी-सी पहल से भी की जा सकती है। अब जरूरत इस बात की है कि उनकी इस पहल को संस्थागत सहयोग मिले, ताकि घायल पशुओं की सेवा का यह अभियान और आगे बढ़ सके।

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